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डिसेबल्ड वार वेटरन्स (इंडिया), विगत वर्षों में खासतौर पर युद्ध में अथवा अन्यत प्रकार के विकल/विकलांग सैनिकों से जुड़े इन मामलों को सुलझाने में जुटा है:

  1. युद्ध में विकल/विकलांग पूर्व सैनिकों के हकों के बारे में 7वें वेतन आयोग को प्रतिवेदन देना, जिसके परिणामों की प्रतीक्षा है।
  2. पी.सी.डी.ए (पी) द्वारा परिपत्र सं 555 के कारण लेफ्टीनेंट, कैप्टेन, मेजर और सिपाही की पेंशन संबंधी विसंगतियों के बारे में न्यायिक आयोग के समक्ष पुरजोर ढंग से उठाया गया। न्यानयमूर्ति रेड्डी से हमारी मुलाकात तथा उन्हें तथ्यों से अवगत कराने के उपरांत उन्होंने स्वीकार किया कि वेतन के 50% फार्मूले पर पेंशन की काल्पानिक (नोशनल) राशि से पेंशन की शुरूआत होनी चाहिए।
  3. इसी मुद्दे से संबंधित प्रतिवेदन माननीय रक्षा मंत्री को दिनांक 1 जुलाई, 2016 को दिया गया और हमें आशा है कि इसके सकारात्ममक परिणाम निकलेंगे।
  4. युद्ध में विकल / विकलांग सैनिकों की विधवाओं एवं आशक्तता के आधार पर सेवामुक़्त किए गए पूर्व सैनिकों के पेंशन हेतु अशक्तता व सेवा घटक को समेकित करते हुए इनकी पेंशन बढ़ाने की हमारी बहुप्रतीक्षित मांग निरंतर जारी है। सातवें वेतन आयोग तथा रक्षा मंत्रालय द्वारा यह मांग ठुकराए जाने के बाद इस मुद्दे को हमने स्कोवा की 28वीं बैठक में एक बार फिर उठाया और सुखद पहलू यह है कि यह मुद्दा एक बार विचारार्थ खुल गया है। हमने जिक्र किया था कि सभी विकल/विकलांगों को इसमें शामिल करके रक्षा मंत्रालय ने हमारे मामले को गलत परिप्रेक्ष्य में लिया है। स्कोवा की 28वीं बैठक में हमने इस मुद्दे को उठाया, जिसके फलस्वलरूप यह मुद्दा विचारार्थ खुल सका। बैठक में भाग ले रहे संयुक्त सचिव (खर्च) ने अध्यक्ष महोदय को सूचित किया गया कि यदि रक्षा मंत्रालय की ओर से यह मुद्दा अग्रेषित किया गया, तो वे शीघ्र ही इसकी मंजूरी दे देंगे।इस मुद्दे पर माननीय रक्षा मंत्री को दिनांक 1 जुलाई, 2016 को एक बार फिर प्रतिवेदन दिया गया और हमें आशा है कि यह मुद्दा सही दिशा में है।
  5. पी.सी.डी.ए (पी) ने रक्षा मंत्रालय के दिनांक 24-02-1972 के पत्रांक 200487/पेंशन-सी/71 को नजरअंदाज कर दिया,जिसे विशेष छूट के रूप में जारी करते हुए निर्धारित किया गया था कि ‘’सेवा घटक, मृत्यु एवं सेवानिवृत्ति उपदान सहित सामान्य अवकाश ग्रहण की पेंशन के बराबर की हकदारी होगी।’’उपर्युक्त्त को संशोधित करते हुए 2001 में तदन्तदर आदेश जारी किए गए। इसका परिणाम यह हुआ कि पी.सी.डी.ए (पी) द्वारा तैयार ड्राफ्ट गवरमेंट लेटर(DGL)से अशक्तता के कारण सेवा मुक़्त किए गए विकल/विकलांग पूर्व सैनिकों को सही हकदारी से बाहर रखा गया।जब इसे माननीय रक्षा मंत्री के समक्ष रखा गया, तो उन्होंने इसका समाधान करने हेतु सहमति दी।
  6. रक्षा मंत्रालय के दिनांक 24 फरवरी, 1972 के पत्रांक 200847/पेंशन-सी/71 को नजरअंदाज करते हुए वास्तविक सेवा पर पी.सी.डी.ए (पी) द्वारा तैयार किए गए सरकारी मसौदा पत्र के आधार पर रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी ओ आर ओ पी के आदेश जारी किए गए हैं। इससे युद्धमें विकल/विकलांग सैनिक की विधवाओं और विकल/विकलांग पूर्व सैनिकों की पेंशन वृद्धि की संभावनाएं पूरी तरह से समाप्त हो गईं हैं। माननीय रक्षा मंत्री ने इस चूक को दूर किए जाने हेतु अपनी सहमति दी है।
  7. रैंक की अधिकतम सेवा के आधार पर सेवा घटक की गणना करने के मुद्दे को स्वीकार कर लिया गया है। रक्षा मंत्रालय के पत्र के आधार पर हमारे प्राधिकार के बारे में पी.सी.डी.ए (पी) के परिपत्र सं. 560 के पैरा 4 (एच) में इसके बारे में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है।
  8. विकलांगता के बाद सेवा में बने रहे सैनिकों के ब्रॉड बैंडिंग के मुद्दे को माननीय रक्षा मंत्री के साथ उठाया गया है। संयुक्ति सचिव(ESW )ने आशवस्त किया है कि वित्त मंत्रालय (व्यय) द्वारा अनुमोदन मिलते ही, आवश्यक आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
  9. संस्था को इसके स्थायी कार्यालय C6-18/1 सफदरजंग डेवलपमेंट एरिया, नई दिल्ली 110016 में शिफ्ट कर दिया गया है।
  10. वर्ष 1987 तक युद्ध में विकलांगों को एक अलग श्रेणी में रखा गया था और उसके बाद उन्हें सेवामुक़्त किए गए अन्य विकलांग पेंशनधारियों के साथ मिला दिया गया। यह वह अवधि थी, जब अशक्ततता को स्वी्कार नहीं किया जाता था। इस विलय के परिणामस्वरूप, ऐसे विकलांग सैनिकों को दी जाने वाली प्राथमिकता बंद कर दी गई। हमने इस मुद्दे का माननीय रक्षा मंत्री के समक्ष उठाया है। हम आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि विशिष्टता की हमारी यह श्रेणी बहाल की जाएगी।
  11. डिवावे ने युद्ध वीर टाइम्स के नाम से पत्रिका शुरू की है जो छप रही है, शीघ्र ही सदस्यों को प्राप्त हो जाएगी ।
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