हकदारी (ENTITLEMENT)

सशस्त्र बलों के पेंशनभोगी / पेंशनभोगी परिवार

रक्षा मंत्रालय के दिनांक 24 फ़रवरी,1972 के नीतिगत पत्र सं. 200847/ पेंशन-सी /71 का सारांश, जिसे वित्त मंत्रालय के 1972 (रक्षा_ 567/Addl FA (D) की समुचित सहमति है।

इस पत्र में निहित है –

“इस पत्र में पेंशन का विधान विशेष स्व रूप का है, जो भविष्य में वेतन और पेंशन संरचना में स्वीकृत किसी प्रकार के संशोधन/परिवर्तन के अधीन नहीं होगा। इन विशेष स्वीकृतियों के अलावा समय-समय पर अस्थायी और/या पेंशन में तदर्थ वृद्धि स्वीकार्य नहीं होगी। हालांकि, मौजूदा नियमों और आदेशों के तहत और स्वीकार्य पेंशन स्वीकृति के अधिक अनुकूल होने पर इसके अंतर्गत, उच्च हकदारी की मंजूरी दी जाएगी। देय उच्ची हकदारी का भुगतान किया जाएगा और शेष राशि का तदर्थ भुगतान अनुदान के रूप में किया जाएगा।”
रक्षा मंत्रालय के दिनांक 24 फ़रवरी, 1972 के पत्र के अनुलग्नतक I में क्रमश: बताया गया है:
“अधिकारी रैंक से नीचे के जो अधिकारी और कार्मिक विकलांगता के आधार पर सेवा से बाहर हो गए हैं, उन्हेंं विकलांगता पेंशन के बजाय सर्विस एवं विकलांगता तत्वों को शामिल करते हुए युद्ध अंग-भंग हेतु भुगतान दिया जाएगा।
सेवा तत्व , उस रैंक की अधिकतम सेवा हेतु, विकलांगता के समय के रैंक में सामान्य अवकाश ग्रहण करने पर देय पेंशन राशि के बराबर होगा। जेसीओ, अन्य रैंक एवं एनसी(ई) वेतन ग्रुप में, उक्त- द्वारा दी गई सेवा हेतु जो भुगतान दिया जा रहा था, उसकी समयावधि पर ध्यान दिए बिना, यह गणना की जाएगी।
100 प्रतिशत विकलांगता के मामले में विकलांगता तत्वों को सर्विस तत्व से घटाते हुए सैनिक द्वारा अंतिम आहरित परिलब्धियों के बराबर राशि होगी, जो रू. 500/- तक सीमित होगी।
20% या इससे अधिक आंकी गई विकलांगता वाले सैनिक को सेवा में बरकरार रखा जाता है और उसे बाद में सेवामुक्त किया जाता है। विकलांग/विकल सैनिक की सेवा निवृत्ति के समय, अंतिम रैंक की सेवा अवधि के संदर्भ में उसके सेवा तत्वों की गणना की जाएगी’’
उपरोक्त से यह स्पष्ट है कि विकलांगता के कारण सेवा से हटाए गए सभी अधिकारी जेसीओ एवं अन्य रैंक के वास्त विक सेवा पर ध्यान दिए बिना उच्चतम रैंक का समान सेवा तत्व उन्हें प्राप्त होगा।
विकलांगता तत्वों के बारे में विचार करते समय सैनिक द्वारा की गई सेवा के आधार पर भिन्नता हो सकती है। सेवा हेतु बरकरार रखे गए सैनिकों के सेवा तत्व, सेवानिवृत्ति के समय उनके रैंक में पेंशन पर आधारित होगा, जबकि विकलांगता तत्वत, अंग-भंगवाले रैंक पर आधारित होगा।

  1. भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय, पूर्व सैनिक कल्याण विभाग, नई दिल्ली-110011 के दिनांक 11/11/2008 के पत्र संख्या 17(4)/2008(1)/डी(पेंशन/नीति) में युद्ध में घायल सैनिकों सहित पूर्व सैनिकों की संशोधित पेंशन हेतु 2006 के पूर्वपेंशन धारकों के लिए छठा वेतन आयोग लागू किया गया है। उक्ती पत्र में 1 जनवरी, 2006 से पेंशन वृद्धि की व्यवस्था की गई है।
  2. रक्षा मंत्रालय के दिनांक 31.01.2001 के पत्र संख्या 1(2)/डी(पेंशन-सी) के पैरा 7.2 में यथाप्रदत्त् अधिकारों के अंतर्गत ‘’ विकलांगता/युद्ध में अंग-भंग के प्रतिशत की व्यापक बैंडिंग की अवधारणा को रक्षा मंत्रालय के दिनांक 19 जनवरी, 2010 के पत्र संख्या 10(01)/डी(पेंशन/नीति)/खंड ।। द्वारा, विगत प्राधिकार में संशोधन करते हुए 01.01.1996 के पहले विकलांगता के कारण सेवा से हटाए गए सशस्त्र बलों के ऐसे अधिकारियों एवं पीबीओआर(PBOR) को भी प्रदान किया जाएगा, जिन्हें दिनांक 01.07.2009 को युद्ध में अंग-भंग पेंशन प्राप्त हो रहा है। उक्त पत्र से यह भी इंगित होता है कि रक्षा मंत्रालय के दिनांक 31.01.2001 के पत्र के पैरा 4.1 में ‘ई’ श्रेणी के विकलांगता वाले पेंशनभोगियों के मामले में आहरित अंतिम परिलब्धियों के संबंध में सशस्त्र बलों एवं पीबीओआर(PBOR) के अधिकारियों हेतु युद्ध में अंग-भंग पेंशन पर से दिनांक 01.07.2009 से रोक हटा ली जाएगी, फिर भी युद्ध में अंग-भंग पेंशन पाने वाले सैनिकों को सरकार के प्रारूप पर तीन प्रतियों में भरकर अपने-अपने पेंशन वितरक अधिकारी को भेजना होगा। युद्ध में अंग-भंग पेंशन के अतिरिक्त, संबंधित अधिकारी को सेवा निवृत्ति ग्रेच्युमटी पाने का भी हकदार होगा।
  3. दिनांक 15 फरवरी, 2011 के पत्र संख्या 17(4)/2008(1)/डी(पेंशन/नीति)/-खंड-V एवं रक्षा मंत्रालय के दिनांक 4-5-2009 के पैरा 2.3 से इंगित होता है कि संशोधित अंग-भंग तत्व दरें:
    1. युद्ध में शत-प्रतिशत विकलांगता हेतु के कारण हटाए जाने के मामले में शत-प्रतिशत से कम नहीं होंगी।
    2. लड़ाई/युद्ध में हताहत हुए सेवा निवृत्ति/हटाए गए सैनिकों के मामले में 100% अंग-भंग के लिए 60%
    3. सैन्य सेवा की परिस्थितियों के कारण विकलांग/विकल होने वाले सैनिकों के लिए 100% विकलांगता हेतु 30%।

    सशस्त्र बल के कार्मिकों की सेवा-निवृत्ति/सेवा मुक्ति/100% अपगंता के समय संशोधित वेतन की संरचना में वेतन बैंड सहित ग्रेड पे, सेन्य सेवा वेतन, पूर्व समूह वेतन (जहां प्रयोज्यक हो)/न्यू नतम वेतन, एचएजी एवं इससे ऊपर के वेतन मान में न्यू नतम वेतन। 100% से कम विकलांगता के मामलों में विकलांगता तत्व को सेवा अवधि और पहले से स्वीकार्य विकलांगता स्तर के अनुपात में कम कर दिया जाएगा।
    सेवा तत्व (रक्षा मंत्रालय के दिनांक 04.05.2009 के पत्र के पैरा 2.1 में संशोधित) और युद्ध में चोट-चपेट तत्व का योग, सशस्त्र बल के कार्मिकों की सेवा-निवृत्ति/सेवा मुक्ति/विकलांगता के समय पूर्व संशोधित वेतनमान के अनुरूप, दिनांक 01.01.2006 से संशोधित वेतनमान संरचना में वेतन बैंड सहित ग्रेड पे, सैन्य सेवा वेतन, पूर्व समूह वेतन (जहां प्रयोज्य हो)/न्यूनतम वेतन, एचएजी एवं इससे ऊपर के वेतनतमान में न्यूनतम वेतन से अधिक नहीं होगा। दिनांक 01.01.2006 से लागू संशोधित न्यूनतम वेतनमान के संदर्भ में युद्ध में चोट-चपेट संबंधी पेंशन के योग की सीमा, यथा उल्लिखित दिनांक 01.07.2009 से हटा ली जाएगी।

  4. अंग-भंग पेंशन का अस्वी करण 
    विकलांगता पेंशन अस्वीकृत कर दिए जाने पर यदि संबंधित सैनिक को लगता है कि उसके मामले में उसकी विकलांगता सेवा के कारण है, तो वह रिकॉर्ड आफिस के माध्यम से 6 महीने के भीतर सरकार से इसके लिए अपील कर सकता है। इसी प्रकार यदि पारिवारिक पेंशन अस्वी कृत कर दी जाए, तो मृतक के परिवार वाले इसके लिए अपील कर सकते हैं।
  5. शिकायत
    यदि ऐसी किसी समस्या के लिए पीसीडीए (पी) के कार्यालय को प्रतिवेदन देना हो, तो अपनी समस्या / शिकायत के पूर्ण विवरण के साथ निम्नलिखित जानकारी / ब्यौरे कृपया उपलब्धी कराएं। ऑनलाइन, ई-मेल या डाक द्वारा कोई शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
    • नाम, रेजीमेंट संख्या, जहां से सेवा निवृत्त हुए वहां का रिकॉर्ड ऑफिस/एच.ओ.ओ.
    • पी.पी.ओ. संख्या और तारीख, जिसके तहत आपको पेंशन देय हुई
    • बचत खाता/चालू खाता संख्या सहित जिस पी.डी.ए./बैंक से पेंशन आहरित किया जा रहा है, उसका नाम
    • आपको आवंटित टीएस/पीएस/एचओ नंबर (डीपीडीओ, कोषागार, डाकघर और पीएओ होने पर)।
  6. सतत उपस्थिति भत्ता
    मेडिकल बोर्ड द्वारा इस भत्ते की सिफारिश की जाती है और रैंक के बारे में ध्याान दिए बगैर यह रू.3000/- है। संशोधित वेतन बैंड पर देय महंगाई भत्ता, जितनी बार 50% होगा, उतनी बार इसमें 25% की वृद्धि होगी। वर्तमान दर रू.3750/- प्रतिमाह है। रक्षा मंत्रालय के दिनांक 5 मई, 2009 के पत्र संख्या 16(6)/2008(2)डी(पेंशन/नीति) का संदर्भ लें।
  7.  

युद्ध में चोट-चपेट के कारण विकलांगता पेंशन

  1. सेवा में विकलांगता की तारीख को वेतन के आधार पर सेवा तत्व, सेवा पेंशन के बराबर होगा, जिसके लिए वो हकदार होता, परंतु देय अधिभार सहित सामान्य कोर्स में उस रैंक में उसकी सेवा‍ निवृत्ति की तारीख तक सेवा की गणना की जाएगी। यह तत्व अर्जित करने हेतु कोई न्यूनतम अर्हक सेवाशर्त नहीं होगी।
  2. युद्ध में अंग-भंग के कारण सेवा से हटाए गए सैनिकों के विकलांगता तत्व की गणना इस प्रकार की जाएगी:
विकलांगता मेडिकल बोर्ड द्वारा अंग-भंग प्रतिशत का निर्धारणयुद्ध में अंग-भंग के प्रतिशत की गणना
50 से कम50
50 से 75 के बीच75
76 से 100 के बीच100

सेवा में बरकरार रहने पर युद्ध में चोट-चपेट संबंधी पेंशन

उपरोक्त परिस्थितयों में युद्ध में चोट-चपेट लगने के कारण, विकलांगता के बावजूद, सेवा में बरकरार रहने एवं बाद में सेवा निवृत्त होने वाले सैनिकों को सरकार द्वारा समय-समय पर, निर्धारित समयावधि में निम्नत विकल्प का चयन करना होगा:

  1. बाद में सेवा मुक्त् होने के समय युद्ध में अंग-भंग तत्व को छोड़ते हुए उसके एवज में एकमुश्त मुआवजा लेना; या
  2. वेतन के 60% की दर से एकमुश्त मुआवजा छोड़ते हुए देय सेवा पेंशन के अतिरिक्त ,सेवा मुक्ति के समय युद्ध में अंग-भंग तत्व लेना।

नेत्रहीन सैनिकों हेतु विशेष पेंशन

INCOME TAX EXEMPTIONS

सैन्य. सेवा के परिणामस्वरूप यदि कोई पूर्व सैनिक पूर्ण या आंशिक अंधेपन के कारण अपनी आजीविका कमाने से वंचित रह जाए, तो मेरिट के आधार पर उसे रू. 500/- प्रतिमाह विशेष पेंशन दी जाती है, जो उसकी सामान्य विकलांगता पेंशन के अतिरिक्त है। प्रत्येक मामले में विशेष पेंशन की स्वीकृति, प्रधान सीडीए (पी) इलाहाबाद के माध्यम से रिकार्ड अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर मंत्रालय द्वारा की जाती है। उपरोक्तर स्वीककृति के आधार पर प्रधान सीडीए (पी) इलाहाबाद द्वारा पीपीओ के माध्यम से विशेष पेंशन अधिसूचित की जाती है। भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय का दिनांक 16.11.2001 का पत्र संख्या 12 एसबी(8)/52-2001/958/डी(आरईएस)।
सैन्य सेवा के परिणामस्वरूप यदि कोई सैनिक पूर्ण या आंशिक अंधेपन के कारण अपनी आजीविका कमाने से वंचित रह जाए, तो उसे विशेष पेंशन देय होगी, बशर्ते निम्न शर्तें पूरी होती हों: –

  1. पूर्ण या आंशिक अंधेपन के कारण सैनिक को सेवा से हटा दिया गया हो।
  2. नेत्रहीनता के कारण उसे पहले से ही विशेष पेंशन न मिल रही हो।
  3. उसे विकलांगता पेंशन मिल रही हो।
  4. सैन्य सेवा में नेत्रहीनता स्वीकार्य है, जिसका निर्धारण 40% अथवा उससे अधिक किया जाता है।
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